हाईलाइट्स:
- श्रद्धांजलि सभा: अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर क्रांतिकारी स्मारक समिति ने शहीद चौक पर किया माल्यार्पण।
- साहस की मिसाल: गोष्ठी में वक्ताओं ने आजाद के जीवन, काकोरी कांड और उनके अदम्य साहस को किया याद।
- महान बलिदान: "नाम आजाद, पिता स्वतंत्रता और पता जेल"—कोर्ट में दिए आजाद के ऐतिहासिक बयान को युवाओं के लिए बताया प्रेरणा।
रसड़ा (सुमित गुप्ता): भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी एवं अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती के अवसर पर गुरुवार को क्रांतिकारी स्मारक समिति के तत्वावधान में नगर के शहीद चौक पर एक भव्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद आयोजित विशेष गोष्ठी में वक्ताओं ने उनके जीवन, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति अतुलनीय समर्पण को याद करते हुए आज की युवा पीढ़ी से उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
कोड़े की हर मार पर गूंजा 'वंदे मातरम्' और 'भारत माता की जय'
गोष्ठी को संबोधित करते हुए क्रांतिकारी स्मारक समिति के प्रवक्ता कृष्णानंद पांडेय ने कहा कि महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भाबरा गांव (झाबुआ) में हुआ था। उन्होंने बनारस में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से जुड़कर क्रांति का अलख जगाया था। आंदोलन के दौरान जब अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, तो उन्होंने बेहद निडरता से अपना नाम "आजाद", पिता का नाम "स्वतंत्रता" और निवास "जेल" बताया था, जिससे ब्रिटिश हुकूमत भी स्तब्ध रह गई थी।
उन्होंने आगे बताया कि इस साहसिक उत्तर के लिए आजाद को 15 कोड़ों की सजा सुनाई गई थी, लेकिन उन्होंने हर कोड़े पर "वंदे मातरम्" और "भारत माता की जय" का उद्घोष कर देशभक्ति की अद्भुत मिसाल पेश की।
मातृभूमि के लिए हंसते-हंसते दे दिया सर्वोच्च बलिदान
वक्ताओं ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने काकोरी कांड सहित देश के कई प्रमुख क्रांतिकारी अभियानों में मुख्य भूमिका निभाई। अंततः 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में जब अंग्रेजी पुलिस ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया, तो उन्होंने अंग्रेजों की गोली से मरने के बजाय अपनी अंतिम गोली से स्वयं को बलिदान कर दिया। उनका यह अद्वितीय त्याग और बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सदैव अमर रहेगा।
समारोह में ये रहे उपस्थित
इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम एवं गोष्ठी में मुख्य रूप से कृष्णानंद पांडेय, दुर्गेश त्रिपाठी, मुख्तार सिंह, ओम प्रकाश बंधु, विनोद राम, संजय यादव, रामविलास, मुलायम, आशीष, जितेंद्र पासवान, लाल बच्चन यादव, रणधीर यादव सहित भारी संख्या में स्थानीय गणमान्य नागरिक और युवा उपस्थित रहे।
