हाईलाइट्स:
- आत्मनिर्भर कृषि का विधिक संकल्प: विकास भवन सभागार में नैनो उर्वरकों की उपयोगिता और सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण पर एक दिवसीय विशेष विधिक व तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न।
- कागजी खानापूर्ति पर रोक: पीसीसीएफ अध्यक्ष बाल्मीकि त्रिपाठी ने समिति सचिवों को दिए निर्देश—धरातल पर जाकर करें प्रक्षेत्र प्रदर्शन, अंधाधुंध दानेदार यूरिया के प्रयोग से मिट्टी की सेहत खराब।
- बिक्री के कड़े विधिक मानक: एआर को-ऑपरेटिव सूर्य नारायण मिश्र व जिला कृषि अधिकारी का सख्त आदेश—हर हाल में 'फार्मर रजिस्ट्री' और खतौनी के आधार पर ही होगी उर्वरक की बिक्री।
बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत विकास भवन सभागार में बुधवार को नैनो उर्वरकों की उपयोगिता और सहकारी समितियों के विधिक व आर्थिक सुदृढ़ीकरण को लेकर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विधिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए पीसीसीएफ उत्तर प्रदेश के माननीय अध्यक्ष बाल्मीकि त्रिपाठी ने देश के आत्मनिर्भर कृषि संकल्प को रेखांकित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब हमें परंपरागत कृषि पद्धतियों से ऊपर उठकर आधुनिक और विधिक रूप से प्रमाणित तकनीकी खेती की ओर अग्रसर होना होगा।
सब्सिडी के विधिक बोझ को कम करने और धरातलीय प्रदर्शन पर जोर
प्राप्त आधिकारिक व स्थलीय विवरण के अनुसार, मुख्य अतिथि बाल्मीकि त्रिपाठी ने समिति सचिवों को विधिक निर्देश जारी करते हुए कहा कि भारत सरकार किसानों की समृद्धि के लिए दानेदार उर्वरकों पर सालाना अरबों रुपये की भारी-भरकम विधिक सब्सिडी वहन कर रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि सचिव केवल कागजी खानापूर्ति न करें, बल्कि ग्रामीण अंचलों में जाकर प्रत्यक्ष किसान सभाओं का विधिक आयोजन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जब तक कृषक भाई नैनो उर्वरकों के उत्कृष्ट परिणामों को प्रक्षेत्र प्रदर्शन के माध्यम से अपनी आंखों से नहीं देखेंगे, तब तक उनके भीतर इस नई विधिक तकनीक के प्रति विश्वास पैदा नहीं होगा।
रासायनिक खाद पर घटे निर्भरता, सुधरेगी मिट्टी की सेहत: सीडीओ ओजस्वी राज
कार्यक्रम की विधिक अध्यक्षता करते हुए मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ओजस्वी राज ने भूमि के स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि खेतों में अंधाधुंध दानेदार उर्वरकों के विधिक व व्यावहारिक प्रयोग से हमारी उपजाऊ मिट्टी की सेहत लगातार खराब हो रही है। उन्होंने समस्त सहकारी समितियों के सचिवों को सख्त हिदायत दी कि वे किसानों को गोबर की खाद, हरी खाद और नैनो उर्वरकों के संतुलित व विधिक प्रयोग के लिए निरंतर प्रेरित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि रासायनिक खाद पर निर्भरता को कम करके ही हम खेती की उत्पादन लागत को विधिक रूप से घटा सकते हैं।
'फार्मर रजिस्ट्री' और खतौनी के बिना नहीं बिकेगी खाद, अवहेलना पर तय होगी विधिक जवाबदेही
कार्यशाला के दौरान सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता (AR Co-operative) सूर्य नारायण मिश्र तथा जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से उर्वरक वितरण प्रणाली को लेकर कड़े विधिक व वैधानिक निर्देश जारी किए। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि जनपद में उर्वरकों की बिक्री हर हाल में शासन की मंशानुसार 'फार्मर रजिस्ट्री' और भू-राजस्व अभिलेख खतौनी के विधिक आधार पर ही सुनिश्चित की जाए। मानकों के विपरीत की गई कोई भी कालाबाजारी या बिक्री विधिक रूप से बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी भी सहकारी समिति द्वारा इन विधिक नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित सचिव की व्यक्तिगत व विधिक जवाबदेही तय करते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
नैनो तकनीक के वैज्ञानिक लाभों को किया गया स्पष्ट
इफको (IFFCO) वाराणसी के क्षेत्रीय प्रबंधक अक्षय पाण्डेय ने नैनो यूरिया प्लस, नैनो डीएपी, नैनो जिंक, नैनो कॉपर और सागरिका के वैज्ञानिक व विधिक लाभों को तकनीकी रूप से स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह विधिक तकनीक पर्यावरण को बिना नुकसान पहुँचाए फसल की गुणवत्ता और उपज में भारी वृद्धि करती है।
इस महत्वपूर्ण व विधिक कार्यक्रम का सफल संचालन इफको बलिया के क्षेत्र अधिकारी आशीष गुप्ता ने किया। इस दौरान जनपद के समस्त एडीओ, एडीसीओ सहकारिता और १०० से अधिक सहकारी समिति सचिवों ने अपनी विधिक उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के समापन पर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को किसानों के बीच 'सहकार से समृद्धि' की विधिक भावना को घर-घर पहुंचाने का संकल्प दिलाया गया।
रिपोर्ट :- रोहित सिंह , टुडे९ उत्तरप्रदेश, बलिया
