हाईलाइट्स:
- मासूम की दर्दनाक मौत: दोकटी क्षेत्र के भगवानपुर गांव में गुरुवार सुबह करीब ७ बजे लोहे के विद्युत खंभे की चपेट में आने से ४ वर्षीय रोशनी ने तोड़ा दम।
- १० वर्षों की विधिक अनदेखी: ग्रामीणों का आरोप—विद्युत विभाग को पिछले ८-१० सालों से लिखित शिकायत, ई-मेल और संपूर्ण समाधान दिवस में दिए जा रहे थे प्रार्थना-पत्र, लेकिन नहीं बदला गया पोल।
- विधिक कार्रवाई व मुआवजे की मांग: घटना के बाद पूरे गांव में पसरा मातम और आक्रोश; दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की पुरजोर मांग।
दोकटी/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत दोकटी थाना क्षेत्र के भगवानपुर गांव से एक बेहद हृदयविदारक और दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां विद्युत विभाग की कथित विधिक लापरवाही और जर्जर बुनियादी ढांचे की वजह से एक चार साल की मासूम बच्ची को अपनी जान गंवानी पड़ी। गांव के बीचो-बीच स्थित एक लोहे के पुराने विद्युत खंभे में उतरे हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आने से मासूम बच्ची की मौत हो गई। इस विधिक हादसे के बाद से पूरे भगवानपुर गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है। ग्रामीण अब दोषी विद्युत अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विधिक मुकदमा दर्ज करने और पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा देने की मांग पर अड़े हैं।
सुबह ७ बजे खेल-खेल में पोल के संपर्क में आई मासूम रोशनी
प्राप्त आधिकारिक व स्थलीय विवरण के अनुसार, भगवानपुर गांव निवासी मिथिलेश साह की चार वर्षीय पुत्री रोशनी गुरुवार की सुबह करीब सात बजे घर के पास खेल रही थी। इसी दौरान वह अनजाने में गांव में ही स्थापित बिजली विभाग के एक लोहे के विद्युत पोल के विधिक संपर्क में आ गई। बरसात के मौसम और तकनीकी खराबी के कारण उस लोहे के खंभे में पहले से ही तगड़ा करंट उतरा हुआ था। करंट की चपेट में आते ही मासूम रोशनी बुरी तरह झुलस गई और अचेत होकर गिर पड़ी। परिजन और ग्रामीण आनन-फानन में अत्यंत गंभीर हालत में उसे उपचार हेतु उच्च प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सोनबरसा ले गए, जहां तैनात चिकित्सकों ने विधिक परीक्षण के उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया।
समाधान दिवस से लेकर ई-मेल तक... १० साल से दी जा रही थी विधिक सूचना
इस दर्दनाक हादसे के बाद स्वास्थ्य केंद्र से लेकर गांव तक बिजली विभाग के खिलाफ विधिक व सार्वजनिक आक्रोश फूट पड़ा। ग्रामीणों ने टुडे९ उत्तरप्रदेश की टीम को बताया कि जिस लोहे के विद्युत खंभे में करंट उतरने से यह हादसा हुआ है, वह अत्यंत जर्जर स्थिति में था। उसे वहां से हटाने या विधिक रूप से सुरक्षित इंसुलेटेड कराने की मांग पिछले आठ से दस वर्षों से लगातार की जा रही थी। ग्रामीणों द्वारा इस गंभीर खतरे के संबंध में विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों को कई बार लिखित शिकायतें, आधिकारिक ई-मेल, तहसील स्तर पर आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में विधिक प्रार्थना-पत्र तथा मौखिक सूचनाएं भी दर्ज कराई गई थीं, लेकिन विभाग कुंभकर्णी नींद सोया रहा।
दोषी अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करने की विधिक मांग
स्थानीय जनता का स्पष्ट रूप से कहना है कि यदि समय रहते बिजली विभाग के जिम्मेदार अभियंताओं और कर्मचारियों ने आवश्यक विधिक कदम उठाए होते, तो आज एक हंसती-खेलती मासूम की जान विधिक रूप से बचाई जा सकती थी। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन बलिया से मांग की है कि इस घोर लापरवाही के जिम्मेदार लाइनमैन, अवर अभियंता (JE) और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भादंवि/बीएनएस की प्रासंगिक विधिक धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए। साथ ही पीड़ित गरीब परिवार को जल्द से जल्द विधिक आर्थिक सहायता व मुआवजा राशि स्वीकृत की जाए, अन्यथा ग्रामीण बड़े आंदोलन के लिए विधिक रूप से बाध्य होंगे।
रिपोर्ट :- रोहित सिंह , टुडे९ उत्तरप्रदेश, बलिया
