हाईलाइट्स:
- कड़ी सजा का ऐलान: विशेष न्यायाधीश पॉक्सो द्वितीय सुरेंद्र प्रताप यादव की अदालत ने अभियुक्त रविंद्र पाल को सुनाई 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा।
- सटीक विवेचना से न्याय: तत्कालीन विवेचक/थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह की प्रभावी व वैज्ञानिक विवेचना के चलते पीड़िता को अदालत से मिला न्याय।
- तीन आरोपी दोषमुक्त: साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने मामले के तीन अन्य नामजद आरोपियों को धारा 504 और 506 आईपीसी में किया दोषमुक्त।
जौनपुर (पंकज राय): जनपद की एक प्रतिष्ठित पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म और धमकी देने के गंभीर मामले में त्वरित सुनवाई करते हुए अभियुक्त को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। माननीय न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या 6 / विशेष न्यायाधीश पॉक्सो द्वितीय सुरेंद्र प्रताप यादव की अदालत ने थाना रामपुर क्षेत्र से जुड़े इस मुकदमे में आरोपी रविंद्र पाल को दोषी करार देते हुए अर्थदंड से भी दंडित किया है। क्षेत्र में इस विधिक कार्रवाई और थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह की सटीक विवेचना की जमकर सराहना हो रही है।
इन धाराओं में अदालत ने तय की सजा और जुर्माना
न्यायालय में विशेष सत्र परीक्षण संख्या 102/23 (मुकदमा अपराध संख्या 58/23) धारा 504, 506, 376 आईपीसी व 5/6 पॉक्सो एक्ट (स्टेट बनाम रविंद्र पाल) की सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ताओं ने प्रभावी पैरवी की। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर माननीय न्यायालय ने मुख्य अभियुक्त रविंद्र पाल को धारा 506 आईपीसी में 2 वर्ष का कारावास व 2,000 रुपये जुर्माना तथा धारा 5/6 पॉक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास व 25,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड न देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
थानाध्यक्ष की प्रभावी विवेचना से अपराधी को अंजाम तक पहुँचाया
जनपद के कानूनी हलकों में चर्चा है कि सुरेरी थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह द्वारा मामले की कमान संभालने और बेहद पेशेवर व पारदर्शी तरीके से की गई विवेचना के चलते ही पीड़िता को यह विधिक न्याय मिल सका है। उनकी ओर से दाखिल किए गए पुख्ता साक्ष्यों के कारण ही अभियुक्त अदालत में बच नहीं सका। वहीं दूसरी ओर, न्यायालय ने सुनवाई के दौरान आरोपी रविंद्र पाल को धारा 504 आईपीसी में दोषमुक्त कर दिया। इसके साथ ही मामले में नामजद अन्य तीन आरोपी गण वीरेंद्र उर्फ अरविंद पाल, पन्ना लाल पाल और उर्मिला देवी को साक्ष्यों के अभाव में धारा 504 व 506 आईपीसी के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।
इस संवेदनशील मामले में सरकार की ओर से अभियोजन की प्रभावी पैरवी विशेष लोक अभियोजक वेद प्रकाश तिवारी और रमेश चंद्र पाल ने संयुक्त रूप से की।
