हाईलाइट्स:
- पुलिस की प्रभावी पैरवी: बलिया पुलिस की मजबूत मॉनिटरिंग और अभियोजन विंग की पैरवी के चलते पॉक्सो (POCSO) व एससी/एसटी एक्ट के शातिर अपराधी को मिली सख्त सजा।
- बांसडीह रोड क्षेत्र का मामला: साल २०२१ में नाबालिक बच्चे को बहला-फुसलाकर पड़ोस की छत पर ले जाकर कुकृत्य करने वाले रितेश गुप्ता को कोर्ट ने माना दोषी।
- आजीवन कारावास और अर्थदंड: विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट (कोर्ट संख्या ८) ने दोषी पर लगाया ४० हजार रुपये का जुर्माना; ५ साल बाद पीड़ित परिवार को मिला न्याय।
बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में जघन्य अपराधों और मासूमों के साथ होने वाले अत्याचारों के खिलाफ चलाए जा रहे 'ऑपरेशन कन्विक्शन' (Operation Conviction) के तहत पुलिस प्रशासन को एक और बहुत बड़ी विधिक सफलता हाथ लगी है। पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी एक्ट से जुड़े एक बेहद संवेदनशील व गंभीर मामले में त्वरित सुनवाई करते हुए बलिया की विशेष अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की कठोर सजा सुनाई है। पुलिस कप्तान के निर्देशन में मॉनिटरिंग सेल द्वारा की गई पुख्ता पैरवी के चलते ही अपराधी को सलाखों के पीछे भेजने में कामयाबी मिली है।
पड़ोस की छत पर मासूम के साथ की थी घिनौनी हरकत
विधिक विवरण के अनुसार, यह सनसनीखेज मामला जनपद के बांसडीह रोड थाना क्षेत्र का है, जहां साल २०२१ में एक नाबालिग मासूम बच्चे के साथ यौन शोषण की दर्दनाक घटना सामने आई थी। दर्ज पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र के रहने वाले रितेश गुप्ता नाम के एक युवक ने वादी के नाबालिग पोते को बहला-फुसलाकर और डरा-धमकाकर पड़ोस की एक सूनी छत पर ले गया था, जहां उसने मासूम के साथ घिनौना कुकृत्य किया। इस घटना के बाद डरे-सहमे पीड़ित पक्ष की लिखित तहरीर पर बांसडीह रोड थाना पुलिस ने सुसंगत व गंभीर विधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू की थी।
पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट की विशेष अदालत ने सुनाया कड़ा फैसला
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बलिया पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों को बेहद मजबूती से अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। अभियोजन अधिकारी विमल कुमार राय की विधिक व प्रभावी पैरवी के बाद बाल न्यायालय/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट (कोर्ट संख्या ८) ने आरोपी रितेश गुप्ता के खिलाफ अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
अदालत ने विधिक धाराओं के तहत सजा का वर्गीकरण इस प्रकार किया है:
- पॉक्सो एक्ट की धारा ६ के अंतर्गत दोषी रितेश गुप्ता को २५ वर्ष के कठोर कारावास और २० हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
- एससी/एसटी एक्ट की धारा ३(२)(V) के तहत आरोपी को सीधे आजीवन कारावास (उम्रकैद) और २० हजार रुपये के अतिरिक्त अर्थदंड से दंडित किया गया।
- जुर्माना राशि न भरने की विधिक स्थिति में दोषी को ०१ वर्ष का अतिरिक्त श्रम कारावास भुगतना होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अपराधियों को सख्त संदेश, पीड़ित परिवार को मिला न्याय
लगभग ५ वर्षों तक चली लंबी विधिक लड़ाई के बाद आए इस ऐतिहासिक फैसले से जहां एक ओर पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर राहत की सांस ली है, वहीं दूसरी ओर समाज में कानून के प्रति विश्वास और सुदृढ़ हुआ है। बलिया पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चल रहे 'ऑपरेशन कन्विक्शन' का मुख्य उद्देश्य ही ऐसे जघन्य और महिला व बाल अपराधों में शामिल दोषियों को बिना देरी किए त्वरित सजा दिलवाना है। पुलिस की इस प्रभावी पैरवी की आम जनमानस और प्रबुद्ध जनों द्वारा जमकर सराहना की जा रही है, जो भविष्य में ऐसे घृणित मानसिकता वाले अपराधियों के लिए एक बड़ा सबक साबित होगा।
