हाईलाइट्स:
- मऊ का बढ़ा मान: रतनपुरा ब्लॉक के बिशनपुरा निवासी युवा गीतकार मुक्तेश्वर पराशर को मिला राष्ट्रीय स्तर का प्रतिष्ठित पुरस्कार।
- भव्य सम्मान समारोह: उत्तराखंड के नैनीताल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने संयुक्त रूप से किया सम्मानित।
- बड़ी पुरस्कार राशि: सम्मान स्वरूप मुक्तेश्वर पराशर को स्मृति चिह्न के साथ 1,00,000 रुपये (एक लाख रुपये) की सम्मान राशि प्रदान की गई।
रतनपुरा/मऊ (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के होनहार युवाओं ने एक बार फिर राष्ट्रीय फलक पर जिले का नाम रोशन किया है। रतनपुरा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम बिशनपुरा निवासी युवा गीतकार मुक्तेश्वर पराशर को उत्तराखंड में वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित 'डॉ. कुमार विश्वास युवा गीतकार पुरस्कार' से नवाजा गया है। इस सम्मान के साथ ही उन्हें एक लाख रुपये की सम्मान राशि भी प्रदान की गई है। उनकी इस अभूतपूर्व सफलता से जिले के साहित्यिक और सामाजिक हलके में हर्ष का माहौल है।
नैनीताल के भव्य समारोह में जुटे देश के नामचीन साहित्यकार
जानकारी के अनुसार, बीते 6 जून को जिम कॉर्बेट रिसॉर्ट, नैनीताल (उत्तराखंड) में 'डॉ. कुमार विश्वास युवा गीतकार पुरस्कार समारोह 2026' का भव्य आयोजन किया गया था। देश के जाने-माने साहित्यकारों और कवियों की गरिमामयी मौजूदगी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं देश के प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने संयुक्त रूप से मुक्तेश्वर पराशर को मंच पर यह गौरवशाली पुरस्कार सौंपा।
सीएम धामी और डॉ. कुमार विश्वास ने की उन्मुक्त कंठ से सराहना
पुरस्कार प्रदान करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि साहित्य और संस्कृति के संवर्धन के लिए देश को मुक्तेश्वर पराशर जैसे ऊर्जावान और मौलिक युवाओं की बेहद जरूरत है। वहीं, हिंदी कविता को वैश्विक मंच देने वाले डॉ. कुमार विश्वास ने मुक्तेश्वर की लेखनी की उन्मुक्त कंठ से प्रशंसा की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समारोह में मौजूद पद्मश्री अशोक चक्रधर एवं वीर रस के प्रख्यात कवि डॉ. हरिओम पंवार ने भी मऊ के इस लाल की साहित्यिक प्रतिभा को जमकर सराहा।
मऊ की साहित्यिक विरासत पंडित श्याम नारायण पांडेय को समर्पित है यह पुरस्कार
राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान ग्रहण करने के बाद दूरभाष पर 'टुडे९ उत्तरप्रदेश' से बात करते हुए भावुक गीतकार मुक्तेश्वर पराशर ने कहा कि यह पुरस्कार केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे मऊ जनपद का सम्मान है। उन्होंने कहा:
"मेरा यह छोटा सा साहित्यिक प्रयास जिले की महान साहित्यिक विरासत के अखंड ज्योति और 'हल्दीघाटी' महाकाव्य के रचयिता पंडित श्याम नारायण पांडेय जी के चरणों में समर्पित है। उन्हीं की गौरवशाली धरती की प्रेरणा से मैं कविता और गीतों की रचना कर पा रहा हूँ।"
जानिए कौन हैं मुक्तेश्वर पराशर?
मुक्तेश्वर पराशर वर्तमान में सनबीम स्कूल, अलीनगर में कार्यरत हैं। बचपन से ही साहित्य, लेखन एवं संगीत में गहरी रुचि रखने वाले मुक्तेश्वर ने अपनी इस बड़ी राष्ट्रीय सफलता का श्रेय अपनी माता ज्ञांति पांडेय, पिता उदयभान पांडेय, सनबीम अलीनगर के प्रबंधक राकेश गर्ग तथा देश-विदेश में मौजूद अपने सभी शुभचिंतकों और पाठकों को दिया है। उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्र के साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों ने बधाई देकर प्रसन्नता व्यक्त की है।
