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फतेहपुर: खागा में आबकारी विभाग की जमीन पर बने वकीलों के चैंबर हटाने का विरोध; समाधान दिवस में CDO को पत्र सौंप जगह देने की मांग


 

हाईलाइट्स:

  • हटाने से पहले मिले जगह: खागा तहसील के अधिवक्ताओं ने उठाई मांग— आबकारी विभाग की भूमि से चैंबर हटाने से पहले बैठने की समुचित व्यवस्था करे प्रशासन।
  • समाधान दिवस में गुहार: वरिष्ठ अधिवक्ता रामसखा द्विवेदी के नेतृत्व में जूनियर वकीलों ने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को पत्र सौंपकर जताई अपनी चिंता।
  • भूमि चिन्हांकन की मांग: वकीलों का कहना— पहले जमीन का पैमाइश कर तय हो दायरा, ८ वर्षों से स्थापित वकीलों की रोजी-रोटी पर न आए संकट।

खागा/फतेहपुर (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद अंतर्गत खागा तहसील परिसर से इस वक्त की एक बड़ी और अधिवक्ताओं के बैठने के स्थान से जुड़ी गंभीर समस्या सामने आ रही है। खागा तहसील में विधि व्यवसाय से जुड़े तमाम जूनियर और वरिष्ठ वकीलों ने समाधान दिवस के अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को एक सामूहिक मांग पत्र सौंपा है। अधिवक्ताओं ने आबकारी विभाग की कथित भूमि पर बने उनके चैंबरों (बस्तों) को जबरन हटाए जाने की चेतावनी के विरोध में आवाज उठाई है और मांग की है कि किसी भी बेदखली से पहले उन्हें बैठने के लिए वैकल्पिक और उचित जगह उपलब्ध कराई जाए।

१२ जून को आबकारी इंस्पेक्टर ने दी थी चैंबर हटाने की चेतावनी

​प्राप्त विवरण के अनुसार, खागा तहसील में वकालत कर रहे तमाम जूनियर वकील पिछले लगभग ८ वर्षों से आबकारी विभाग की खाली पड़ी कथित भूमि पर अपने-अपने चैंबर (बस्ते) बनाकर शांतिपूर्ण ढंग से विधिक सेवाएं दे रहे हैं। बीते १२ जून २०२६ को आबकारी विभाग के इंस्पेक्टर रमेश सिंह ने बार एसोसिएशन खागा के अध्यक्ष के माध्यम से एक नोटिस/चेतावनी जारी की थी। इस चेतावनी में आबकारी की भूमि पर बने समस्त वकीलों के चैंबरों को तत्काल हटाने का निर्देश दिया गया था, जिसके बाद से ही खागा के जूनियर वकीलों में भारी आक्रोश और अनिश्चितता का माहौल व्याप्त है।

"पहले हो जमीन का चिन्हांकन, फिर मिले वैकल्पिक जगह"— वरिष्ठ अधिवक्ता रामसखा द्विवेदी

​जूनियर वकीलों की इस लड़ाई का नेतृत्व कर रहे क्षेत्र के वरिष्ठ अधिवक्ता रामसखा द्विवेदी ने समाधान दिवस में प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र सौंपते हुए पूरी स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जहां पर वकील सालों से बैठकर अपनी विधिक सेवाएं दे रहे हैं, प्रशासन को पहले वहीं उनके बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

​अधिवक्ताओं ने प्रशासन के सामने प्रमुख रूप से यह मांगें रखी हैं कि सबसे पहले राजस्व विभाग और आबकारी विभाग मिलकर उक्त कथित भूमि का विधिवत चिन्हांकन (पैमाइश) करें, ताकि यह स्पष्ट रूप से पता चल सके कि वास्तव में कितने वकीलों के चैंबर प्रभावित हो रहे हैं। इसके पश्चात, प्रभावित होने वाले सभी अधिवक्ताओं को तहसील परिसर में ही कहीं और उचित स्थान पर नए चैंबर बनाने हेतु जमीन व जगह आवंटित की जाए, उसके बाद ही वर्तमान चैंबरों को वहां से हटाया जाए, अन्यथा वकील इसका पुरजोर विरोध करेंगे।

समाधान दिवस में सैकड़ों वकीलों ने दिखाई एकजुटता

​इस महत्वपूर्ण मांग पत्र को सौंपने और अपनी आवाज बुलंद करने के लिए खागा तहसील के सैकड़ों अधिवक्ता एकजुट नजर आए। इस मौके पर मुख्य रूप से वरिष्ठ अधिवक्ता रामसखा द्विवेदी, मोहम्मद इसराइल फारूकी, श्याम कुमार गुप्ता पंकज, अखिलेश यादव, आशीष शुक्ला, अभिमन्यु सिंह मौर्य, अनूप कौशल, नीतू जायसवाल एडवोकेट, आशीष कुमार सिंह एडवोकेट, स्मिता एडवोकेट, आकाश मौर्य, सत्य प्रकाश यादव, रोहित एडवोकेट, उमेश मौर्य, धर्मेंद्र मौर्य, सुनील कुमार सिंह, चित्रसेन, अनिल कुमार, कृष्णा एडवोकेट, चंद्रभान सिंह, नीरज कुमार, अभिषेक कुमार, कृष्ण कुमार तिवारी, अभिषेक श्रीवास्तव, हेमचंद्र विश्वकर्मा, पप्पू, शिवशंकर यादव, शिव सिंह, पवन अग्रहरि, आर डी यादव, बलराम सिंह, आदर्श सिंह एडवोकेट, मनोज कुमार, रवि कुमार, पुष्कर मौर्य, मनीष शुक्ला, कुबेर सिंह एडवोकेट, प्रशांत कुमार एडवोकेट, कमलेश लोधी एडवोकेट और आशीष लोधी उर्फ सारंग सहित भारी संख्या में स्थानीय वकील व उनके सहयोगी उपस्थित रहे।

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